2025-08-24 13:02:11 CEST

npub1ww…tw5e6 on Nostr: छान्दोग्य ५॰१०॰७ भाष्य। ॰ ...

छान्दोग्य ५॰१०॰७ भाष्य। ॰ योनिमापद्येरन् प्राप्नुयुः ॰ स्वकर्मानुरूपेण। स्मृत्यादि शास्त्र के नियम इसके अनुरूप प्रतीत होते हैं।